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राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार का बदला नाम, अब मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार के नाम से जाना जाएगा




भारत में अक्सर कई पुरस्कार और स्थानों के नाम उनके संबंधित व्यक्तियों की बजाय राजनीतिक व्यक्तियों के आधार पर रखे हुए हैं। ऐसे में वास्तविक प्रतिभाओं को प्रसन्न मिलने की बजाय राजनीतिक है अखाड़ों के वोट बैंक का हिस्सा बन जाता है। लेकिन ना देश में यह पहली बार ऐसा हुआ है जब किसी पुरस्कार का नाम उससे संबंधित क्षेत्र के प्रतिभा के नाम पर रखा।


मोदी सरकार ने शुक्रवार (6 अगस्त 2021) को खेल रत्न पुरस्कार नाम बदलकर अब मेजर ध्यानचंद के नाम पर दिया। मोदी ने बताया कि इसके लिए देश भर से नागरिकों का आग्रह मिला है। खेल रत्न अब तक पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गॉंधी के नाम पर था। पीएम ने ट्वीट कर कहा है, “मेजर ध्यानचंद के नाम पर खेल रत्न पुरस्कार का नाम रखने के लिए देशभर से नागरिकों का अनुरोध मिले हैं। मैं उनके विचारों के लिए उनका धन्यवाद करता हूँ। उनकी भावना का सम्मान करते हुए, खेल रत्न पुरस्कार को मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार कहा जाएगा! जय हिंद!”

पीएम ने आगे कहा, “ओलंपिक खेलों में भारतीय खिलाड़ियों के शानदार प्रयासों से हम सभी अभिभूत हैं। विशेषकर हॉकी में हमारे बेटे-बेटियों ने जो इच्छाशक्ति दिखाई है, जीत के प्रति जो ललक दिखाई है, वो वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों के लिए बहुत बड़ी प्रेरणा है।” प्रधानमंत्री ने कहा कि ध्यानचंद भारत के पहले खिलाड़ी थे, जो देश के लिए सम्मान और गर्व लाए। देश में खेल का सर्वोच्च पुरस्कार उनके नाम पर रखा जाना ही उचित है। 

मेजर ध्यानचंद का जन्म 29 अगस्त 1905 को प्रयागराज में हुआ था। भारत में यह दिन राष्ट्रीय खेल दिवस के रूप में मनाया जाता है। उन्हें हॉकी का जादूगर कहा जाता है।

राजीव गाँधी खेल रत्न भारत में खेल के क्षेत्र में दिया जाने वाला सर्वोच्च पुरस्कार है। 1992 में इसकी शुरुआत की गई थी। पहला खेल रत्न ग्रैंड मास्टर विश्वनाथन आनंद को मिला था। अब तक 45 लोगों को ये पुरस्कार मिल चुका है। इनमें तीन हॉकी खिलाड़ी भी हैं। इनके नाम हैं- धनराज पिल्लै, सरदार सिंह और रानी रामपाल।


हॉकी का जादूगर मेजर ध्यानचंद 


भारतीय हॉकी टीम व हाॅकी खेल के इतिहास और वर्तमान के परिवेश में अगर देखा जाए तो मेजर ध्यानचंद के मुकाबले में कोई भी खिलाड़ी नहीं है। किसी भी खिलाड़ी की महानता को नापने का सबसे बड़ा पैमाना है कि उसके साथ कितनी किंवदंतियाँ जुड़ी हैं। उस हिसाब से तो मेजर ध्यानचंद का कोई जवाब नहीं है। ऐसा माना जाता है कि हॉलैंड में लोगों ने उनकी हॉकी स्टिक तुड़वा कर देखी कि कहीं उसमें चुंबक तो नहीं लगा है। जापान के लोगों को अंदेशा था कि उन्होंने अपनी स्टिक में गोंद लगा रखी है। लेकिन उनकी यह खेल की अद्भुत प्रतिभा थी जिसका लोहा पूरा विश्व ने माना। विश्व इन से इतना प्रभावित है कि आप एक उदाहरण से समझ सकते हैं कि वियना के स्पोर्ट्स क्लब में उनकी एक मूर्ति लगी। जिसमें उनके चार हाथ और उनमें चार स्टिकें दिखाई गई हैं, मानों कि वो कोई देवता हों।


ध्यानचंद के गोल हमेशा गोलकीपरों के लिए थे चुनौती 


लोग अपने अनुभव से करते हुए बताते हैं कि मेजर ध्यानचंद जब गेंद के साथ गोल करने के लिए आगे बढ़ते थे तो लोगों को लगता था जैसे गेंद की स्थिति चिपकी हुई है। वर्षा 1936 के बर्लिन ओलंपिक में उनके साथ खेले और बाद में पाकिस्तान के कप्तान बने आईएनएस दारा ने वर्ल्ड हॉकी मैगज़ीन के एक अंक में लिखा था कि"ध्यान के पास कभी भी तेज़ गति नहीं थी बल्कि वो धीमा ही दौड़ते थे। लेकिन उनके पास गैप को पहचानने की गज़ब की क्षमता थी। बाएं फ्लैंक में उनके भाई रूप सिंह और दाएं फ़्लैंक में मुझे उनके बॉल डिस्ट्रीब्यूशन का बहुत फ़ायदा मिला। डी में घुसने के बाद वो इतनी तेज़ी और ताकत से शॉट लगाते थे कि दुनिया के बेहतरीन से बेहतरीन गोलकीपर के लिए भी कोई मौका नहीं रहता था।" 

बहुत से लोग उनकी मज़बूत कलाईयों ओर ड्रिब्लिंग के कायल थे। लेकिन उनकी असली प्रतिभा उनके दिमाग़ में थी। वो उस ढंग से हॉकी के मैदान को देख सकते थे जैसे शतरंज का खिलाड़ी चेस बोर्ड को देखता है। उनको बिना देखे ही पता होता था कि मैदान के किस हिस्से में उनकी टीम के खिलाड़ी और प्रतिद्वंदी मूव कर रहे हैं।


भारत रत्न का है इंतजार, लेकिन खेल रत्न पुरस्कार नाम से मिला मेजर ध्यानचंद को सम्मान


हॉकी के जादूगर कहे जाने वाले मेजर ध्यानचंद को अभी तक भारत रत्न पुरस्कार नहीं मिला है। इसकी मांग लंबे समय से चली आ रही है। लोग और राजनीतिक दल मेजर ध्यानचंद को भारत रत्न पुरस्कार देने की मांग जोर-शोर से कर रहे हैं। लेकिन भारत रत्न पुरस्कार नहीं मिलने से कई लोग निराश भी हैं। पीएम मोदी ने शुक्रवार को की घोषणा के बाद कुछ हद तक लोगों में संतुष्टि व्याप्त हुई है। क्योंकि मेजर ध्यानचंद के सम्मान में राजीव गांधी खेल पुरस्कार का नाम बदलकर के मेजर ध्यानचंद खेल पुरस्कार रख दिया गया है। यह एक प्रकार से मेजर ध्यानचंद को सम्मान देने वाला कार्य है

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